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रूपकुंड झील में तैरते हैं 500 कंकाल – कौन थे ये लोग और क्या है सच्चाई? जानिए इस रहस्यमयी झील का पूरा सच!

रूपकुंड झील

भारत के उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है एक रहस्यमयी झील, जिसे रूपकुंड झील कहा जाता है। यह झील करीब 5,029 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और साल के ज़्यादातर समय बर्फ से ढकी रहती है। लेकिन गर्मियों में जब बर्फ पिघलती है, तो इसके नीचे से सैकड़ों कंकालों के ढांचे दिखाई देते हैं – और यहीं से शुरू होता है एक अद्भुत रहस्य, जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों और इतिहासकारों को चौंका दिया।


रूपकुंड झील में तैरते हैं 500 कंकाल – क्यों हैं ये आज भी रहस्य?

रूपकुंड झील को अक्सर “Skeleton Lake” भी कहा जाता है क्योंकि इसमें लगभग 500 से अधिक मानव कंकाल तैरते हुए या झील के किनारे पड़े हुए पाए गए हैं।

ये कंकाल 1942 में सबसे पहले एक ब्रिटिश फॉरेस्ट गार्ड द्वारा खोजे गए थे। उन्होंने झील के पास बड़ी संख्या में मानव अस्थियों को देखा, जिनमें खोपड़ी, पसलियाँ, जांघ की हड्डियाँ आदि शामिल थीं।

आज भी जब बर्फ पिघलती है, तो ये कंकाल किसी सावधान करने वाली कहानी की तरह सामने आ जाते हैं। लेकिन सवाल उठता है – ये लोग कौन थे, और इतनी बड़ी संख्या में यहां क्यों मरे?


वैज्ञानिक शोध और DNA जांच क्या कहती है?

इस रहस्य को सुलझाने के लिए कई वर्षों से वैज्ञानिक रिसर्च चल रही है। 2004 में, भारतीय और यूरोपीय वैज्ञानिकों की टीम ने इन कंकालों की DNA जांच की और कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:


ये लोग कहां से आए थे?

DNA परीक्षणों से पता चला है कि इन कंकालों में दो प्रमुख समूह थे:

  1. एक समूह दक्षिण भारत से संबंधित था – ये लोग लंबी यात्रा पर निकले यात्री हो सकते हैं।
  2. दूसरा समूह स्थानीय लोग थे, जो संभवतः गाइड या कुली के रूप में साथ थे।

इन सबका एक साथ एक ही स्थान पर होना यह दर्शाता है कि वे तीर्थ यात्रा या विशेष यात्रा पर निकले थे, लेकिन अचानक मौसम की मार से सबकी मौत हो गई।


धार्मिक मान्यताएं और किंवदंतियाँ

स्थानीय लोगों की मान्यताओं के अनुसार, यह एक राजा और उसकी प्रजा की यात्रा थी। कहा जाता है कि एक राजा अपनी रानी और सेवकों के साथ नंदा देवी मंदिर की तीर्थयात्रा पर निकला था। लेकिन उन्होंने यात्रा के दौरान नंदा देवी का अपमान किया, जिससे देवी क्रोधित हो गईं और उन्होंने ओलों की बारिश से सभी को दंडित किया।

इस कथा को स्थानीय लोग आज भी श्रद्धा से मानते हैं, और इसे नंदा देवी राज जात यात्रा से जोड़ा जाता है, जो हर 12 साल में एक बार होती है।


पर्यटक स्थल के रूप में रूपकुंड झील

आज रूपकुंड झील एक पॉपुलर ट्रेकिंग डेस्टिनेशन बन चुका है, जहाँ एडवेंचर प्रेमी हजारों की संख्या में पहुंचते हैं:

पर्यटक यहां कंकालों को देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं, और यह अनुभव उन्हें जीवनभर याद रहता है।

रूपकुंड झील

पर्यावरणीय खतरे और संरक्षण

हालांकि यहां आना रोमांचक होता है, लेकिन प्राकृतिक विरासत को बचाए रखना बहुत ज़रूरी है। कई पर्यटक झील से हड्डियाँ या चीजें उठा लेते हैं, जो संवेदनशील ऐतिहासिक साक्ष्य हैं। सरकार ने इस क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया है और ट्रेकर्स को चेतावनी दी जाती है कि वे प्राकृतिक वस्तुओं को नुकसान न पहुँचाएं।


निष्कर्ष: एक झील, एक रहस्य, और एक चेतावनी

रूपकुंड झील सिर्फ एक झील नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की शक्ति और रहस्य का अद्भुत उदाहरण है।
रूपकुंड झील में तैरते हैं 500 कंकाल” – यह वाक्य न केवल चौंकाता है, बल्कि हमें यह भी याद दिलाता है कि प्रकृति के सामने इंसान कितना असहाय हो सकता है।


क्या आप कभी रूपकुंड झील जाना चाहेंगे?

अगर आप साहसिक यात्रा और इतिहास में रुचि रखते हैं, तो रूपकुंड आपके लिए एक परफेक्ट जगह हो सकती है। लेकिन ध्यान रहे – यह सिर्फ ट्रेकिंग स्पॉट नहीं, बल्कि सैकड़ों आत्माओं की अंतिम विश्राम स्थली भी है।

क्या आपको लगता है इन कंकालों की आत्माएं आज भी वहां भटकती हैं? नीचे कमेंट करके बताइए और इस रहस्यमयी कहानी को दूसरों के साथ शेयर कीजिए!

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