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क्या आपको पता है भारत के पास है इतनी तेल की कुएँ? – जानिए भारत के काले सोने का भंडार!

भारत के पास है इतनी तेल की कुएँ

Image credit by: Shutterstock

तेल, जिसे अक्सर “काला सोना” कहा जाता है, दुनिया की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को चलाने वाला प्रमुख ईंधन है। आज के समय में कोई भी देश आर्थिक रूप से शक्तिशाली तभी बन सकता है जब उसके पास ऊर्जा संसाधनों का मजबूत भंडार हो – और इसमें कच्चा तेल एक प्रमुख स्त्रोत है।

लेकिन सवाल यह है कि –
क्या आपको पता है भारत के पास है इतनी तेल की कुएँ?
क्या भारत आत्मनिर्भर है अपनी तेल ज़रूरतों के लिए या हम पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं?

आइए जानते हैं भारत के तेल क्षेत्रों, कुओं की स्थिति और उनके पीछे के भूगर्भीय रहस्य।


क्या आपको पता है भारत के पास है इतनी तेल की कुएँ?


भारत में कच्चे तेल की खोज सबसे पहले 1867 में असम के डिगबोई में हुई थी।
कहते हैं, डिगबोई नाम इस तरह पड़ा – जब अंग्रेज इंजीनियर खनन करवा रहे थे, तो वे कहते थे “Dig, Boy! Dig!” और वहीं से यह नाम पड़ा।

यह एशिया का पहला तेल क्षेत्र बना और यहीं से भारत में तेल उद्योग की नींव पड़ी।


भारत के प्रमुख तेल क्षेत्र

भारत के पास कई प्रमुख तेल कुएँ और क्षेत्र हैं जो अलग-अलग राज्यों में फैले हुए हैं। आइए देखते हैं भारत में कहां-कहां तेल के भंडार हैं:

1. बॉम्बे हाई (मुंबई हाई) – महाराष्ट्र के पास समुद्र में
2. असम का डिगबोई, नाहरकटिया और मोरान क्षेत्र
3. राजस्थान का बाड़मेर क्षेत्र (CAIRN Energy द्वारा विकसित)
4. कृष्णा-गोदावरी बेसिन (आंध्र प्रदेश में)
5. कावेरी बेसिन (तमिलनाडु और पुडुचेरी के पास)

भारत के पास है इतनी तेल की कुएँ
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भारत के पास कुल कितनी तेल की कुएँ हैं?

भारत में हजारों तेल कुएँ हैं, लेकिन प्रमुख रूप से लगभग 26 बड़े ऑयल फील्ड्स हैं जहाँ से नियमित उत्पादन होता है।

ONGC, Oil India, और CAIRN India जैसी कंपनियाँ मिलकर भारत में लगभग 4500 से अधिक कुओं से तेल निकालती हैं।


क्या भारत आत्मनिर्भर है कच्चे तेल में?

यहाँ एक महत्वपूर्ण तथ्य है –
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 80-85% तेल आयात करता है।

➡️ यानी भारत में कुएँ तो हैं, पर मांग की तुलना में उत्पादन बहुत कम है।
➡️ भारत में प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल तेल की जरूरत होती है, जबकि उत्पादन 6-7 लाख बैरल/दिन ही होता है।


क्या और तेल भंडार खोजे जा रहे हैं?

जी हाँ! भारत सरकार और तेल कंपनियाँ नए ब्लॉक्स की खोज (Exploration Licensing Policy) के तहत नई जगहों पर तेल और गैस की तलाश कर रही हैं:


भारत का भविष्य: कच्चे तेल से आगे

चूंकि आयात पर निर्भरता भारत की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है, इसलिए सरकार ग्रीन एनर्जी, बायोफ्यूल, और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ ध्यान दे रही है।

परंतु जब तक ऐसा ट्रांजिशन पूरा नहीं होता, तब तक भारत को अपने तेल कुओं की संख्या और उत्पादन क्षमता को और मजबूत करना होगा।


निष्कर्ष: क्या भारत के पास है पर्याप्त तेल की कुएँ?

हां, भारत के पास तेल की कुएँ हैं – और कई प्रमुख तेल क्षेत्र भी हैं।
लेकिन मांग की तुलना में उत्पादन बहुत कम है, और इसी वजह से भारत को 80% से अधिक तेल विदेशों से मंगवाना पड़ता है।

“क्या आपको पता है भारत के पास है इतनी तेल की कुएँ?”
अब आप इसका उत्तर जानते हैं – हां, पर और खोज की ज़रूरत है!


आपकी राय?

क्या भारत को और अधिक तेल उत्पादन पर फोकस करना चाहिए या ग्रीन एनर्जी पर?

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