भारत का वह मंदिर जहाँ भगवान को चढ़ाई जाती है शराब – जानिए इसकी अनोखी परंपरा!

मंदिर जहाँ भगवान को चढ़ाई जाती है शराब

भारत विविधताओं और अनोखी परंपराओं का देश है। यहाँ पूजा-पाठ से जुड़े कई ऐसे रीति-रिवाज हैं जो पहली बार सुनने पर किसी को भी चौंका सकते हैं। आमतौर पर मंदिरों में भगवान को फल, फूल, मिठाई और नारियल चढ़ाने की परंपरा होती है, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में कुछ ऐसे मंदिर जहाँ भगवान को चढ़ाई जाती है शराब(मदिरा) चढ़ाई जाती है? जी हाँ, यह सुनकर भले ही अजीब लगे, लेकिन यह एक सच्चाई है और इसका इतिहास और धार्मिक महत्व भी है।


कौन सा है वह मंदिर जहाँ भगवान को चढ़ाई जाती है शराब?

भारत में ऐसे कई मंदिर जहाँ भगवान को चढ़ाई जाती है शराब की परंपरा है, लेकिन सबसे प्रसिद्ध मंदिर है राजस्थान का भैरव बाबा का मंदिर, जिसे काल भैरव मंदिर (उज्जैन, मध्यप्रदेश) भी कहा जाता है।


मंदिर जहाँ भगवान को चढ़ाई जाती है शराब

काल भैरव मंदिर, उज्जैन

  • यह मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है।
  • यहाँ के मुख्य देवता हैं काल भैरव, जिन्हें भगवान शिव का उग्र रूप माना जाता है।
  • इस मंदिर में भक्त मदिरा (शराब) को प्रसाद के रूप में अर्पित करते हैं।
  • खास बात यह है कि यहाँ पर चढ़ाई गई शराब को भैरव बाबा स्वयं स्वीकार करते हैं

भैरव बाबा शराब कैसे पीते हैं?

यहाँ एक अनोखा चमत्कार देखने को मिलता है। जब पुजारी भैरव बाबा की मूर्ति के सामने कटोरी में शराब भरकर रखते हैं, तो धीरे-धीरे वह शराब गायब हो जाती है। ऐसा लगता है मानो मूर्ति स्वयं उस मदिरा को पी रही हो।

वैज्ञानिक इसे मूर्ति के भीतर बने किसी विशेष पाइप या छेद का परिणाम मानते हैं, लेकिन भक्त इसे भैरव बाबा का चमत्कार मानते हैं।


इतिहास और मान्यता

काल भैरव मंदिर का इतिहास त्रिकालीन तांत्रिक साधना से जुड़ा है। कहा जाता है कि:

  • तंत्र साधना में पंच मकार (मदिरा, मांस, मुद्रा, मैथुन, मत्स्य) का महत्व है।
  • इसमें मदिरा (शराब) को ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
  • माना जाता है कि भैरव बाबा को शराब अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर बाधा दूर करते हैं।

क्या यह परंपरा सिर्फ उज्जैन में है?

नहीं। भारत में और भी कई जगहों पर ऐसी परंपरा है:

  1. गुवाहाटी का कामाख्या मंदिर (असम): यहाँ तांत्रिक अनुष्ठान के समय मदिरा का उपयोग होता है।
  2. कालीघाट का काली मंदिर (कोलकाता): कुछ विशेष दिनों पर काली माता को मदिरा अर्पित की जाती है।
  3. त्रिपुरा का त्रिपुरेश्वरी मंदिर: यहाँ भी शक्ति पूजा के समय शराब चढ़ाई जाती है।
  4. गोरखनाथ मंदिर परिसर के कुछ छोटे भैरव स्थलों पर।

भक्तों की आस्था

भैरव बाबा के भक्त मानते हैं कि:

  • शराब चढ़ाने से जीवन की नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं।
  • तंत्र, मंत्र और भूत-प्रेत का असर खत्म होता है।
  • व्यापार और नौकरी में सफलता मिलती है।
  • यात्रा सुरक्षित रहती है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक मानते हैं कि:

  • मूर्ति में गुप्त पाइपलाइन बनी होती है।
  • शराब एक विशेष पात्र में एकत्र हो जाती है।
  • इसे बाद में पुजारी बाहर निकालते हैं।

लेकिन भक्तों के लिए यह श्रद्धा और आस्था का विषय है।


क्या यह परंपरा सही है?

धार्मिक दृष्टि से देखें तो भारत में हर क्षेत्र की अपनी मान्यता है।
कुछ लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, जबकि भक्त इसे सदियों पुरानी परंपरा और तांत्रिक साधना का हिस्सा मानते हैं।


निष्कर्ष

भारत का यह मंदिर दिखाता है कि यहाँ की संस्कृति कितनी गहरी और विविध है। जहाँ एक ओर भगवान को दूध और मिठाई चढ़ाई जाती है, वहीं कहीं शराब भी भक्ति का हिस्सा बन जाती है। यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि भारत की आध्यात्मिक विविधता का प्रतीक है।

यह सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि भारत की उस गहराई का प्रमाण है जहाँ हर विश्वास को जगह दी गई है।

आप क्या सोचते इस मंदिर बारे में कमेंट करके बताइए, और इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें।

अपने ब्लॉग में नीचे दिए गए टॉपिक्स से भी लिंक करें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *