भारत एक ऐसा देश है जहाँ रहस्य, आध्यात्म और चमत्कारों की कथाएं सदियों से जीवित हैं। यहाँ अनेक ऐसे योगी, तपस्वी और संत हुए हैं जिनकी उम्र और शक्तियाँ आज भी विज्ञान की सोच से परे हैं। इन्हीं में से एक हैं – देवराहा बाबा, जिन्हें अक्सर “200 साल से ज़िंदा रह चुके साधु” कहा जाता है। क्या यह केवल एक किंवदंती है या इसके पीछे कुछ सच्चाई छुपी है? चलिए जानते हैं देवराहा बाबा की चौंकाने वाली कहानी।
कौन थे देवराहा बाबा?
देवराहा बाबा एक सिद्ध योगी और रहस्यमयी संत थे, जिनका जीवन रहस्य, तप और चमत्कारों से भरा हुआ था। उनका जन्म कब हुआ, इसकी कोई ठोस जानकारी नहीं है, लेकिन माना जाता है कि वे दो शताब्दियों तक इस धरती पर जीवित रहे। कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने भगवान राम के समय से लेकर आधुनिक भारत के नेताओं तक को देखा था।
बाबा जी का मुख्य आश्रम उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के पास स्थित था, और वहीं से उन्हें “देवराहा बाबा” नाम मिला। वे गंगा के किनारे लकड़ी के एक ऊँचे चबूतरे पर रहते थे और बहुत कम ही जमीन पर आते थे।
क्या सच में थे 200 साल के?
यह सबसे बड़ा रहस्य है! देवराहा बाबा की उम्र को लेकर कोई सरकारी दस्तावेज या मेडिकल प्रमाण नहीं है, लेकिन देश के कई बुज़ुर्ग और संतों ने दावा किया कि उन्होंने बचपन में अपने दादा से भी बाबा को देखा था।
इतना ही नहीं, बाबा जी ने भारत के कई नेताओं से भी मुलाकात की – जैसे कि पं. नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, राजीव गांधी और कई अन्य। यह तथ्य उनकी लम्बी उम्र की पुष्टि करता है।
चमत्कारों से भरा जीवन
देवराहा बाबा के जीवन में ऐसे कई चमत्कारों की कहानियाँ प्रचलित हैं:
- कहा जाता है कि वे बिना खाए-पिए वर्षों तक जीवित रहे।
- बाबा जी जल पर चल सकते थे, यह दावा कई स्थानीय लोग करते हैं।
- उन्हें किसी भी जीव-जंतु से भय नहीं था – मगरमच्छ तक उनके पास आकर शांत हो जाते थे।
- वे एक व्यक्ति के भविष्य और अतीत को बिना पूछे जान लेते थे।
देवराहा बाबा की दिनचर्या
बाबा जी साधारण जीवन जीते थे – वे कपड़े भी नहीं पहनते थे और केवल एक लंगोटी में रहते थे। वे प्रतिदिन सुबह और शाम ध्यान करते, लोगों को आशीर्वाद देते और केवल संस्कृत या संकेतों में बात करते थे।
लाखों भक्त हर वर्ष गंगा किनारे उनके दर्शन करने आते थे। उन्होंने कभी किसी धर्म, जाति या समुदाय में भेद नहीं किया। उनका संदेश केवल एक था – “ईश्वर में विश्वास रखो और अपने कर्म को सुधारो।”

देवराहा बाबा और भारत के राजनेता
कहा जाता है कि इंदिरा गांधी चुनाव से पहले उनका आशीर्वाद लेने गई थीं। राजीव गांधी भी उनसे मिलने पहुंचे थे। यहाँ तक कि अटल बिहारी वाजपेयी ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि बाबा जी दिव्य पुरुष हैं।
इन मुलाक़ातों से एक बात साफ है – देवराहा बाबा न केवल आध्यात्मिक रूप से महान थे, बल्कि उनका प्रभाव भारत के राजनीतिक और सामाजिक जीवन पर भी था।
देवराहा बाबा 200 साल से ज़िंदा है का रहस्य?
1989 में देवराहा बाबा ने अपने शरीर का त्याग किया, लेकिन उनके निधन को लेकर आज भी कई भ्रम हैं। कुछ लोग मानते हैं कि उन्होंने समाधि ली, कुछ कहते हैं कि वे अब भी किसी गुप्त स्थान पर जीवित हैं और तपस्या कर रहे हैं।
उनके जाने के बाद भी उनके भक्तों की संख्या में कमी नहीं आई। आज भी लोग उनकी तस्वीरों को देखकर श्रद्धा से सिर झुकाते हैं।
निष्कर्ष: चमत्कार या चेतना?
देवराहा बाबा केवल एक साधु नहीं थे, वे भारतीय संस्कृति में आस्था, तप और रहस्य के प्रतीक थे। उनकी कथाएँ भले ही अविश्वसनीय लगें, लेकिन उनके प्रभाव और उपस्थिति को कोई नकार नहीं सकता।
क्या वे वाकई 200 साल तक जीवित रहे? यह सवाल शायद कभी हल न हो, लेकिन उनके जीवन से हमें यह सीख ज़रूर मिलती है – जब मनुष्य आत्मिक शक्ति से जुड़ता है, तो समय और शरीर की सीमाएं भी टूट जाती हैं।
क्या आपने कभी देवराहा बाबा के बारे में सुना था? क्या आप मानते हैं कि कोई 200 साल तक जीवित रह सकता है? नीचे कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं!
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