क्या ताज महल बनाने के बाद 20,000 मज़दूरों के हाथ काट दिए गए?

कहा जाता है कि शाहजहाँ ने ताजमहल बनाने के बाद 20,000 मज़दूरों के हाथ कटवा दिए, ताकि वे कभी दोबारा ऐसा कोई अद्भुत निर्माण न कर सकें। लेकिन क्या ये सच है?

कोई भी ऐतिहासिक दस्तावेज, फारसी लेख, या समकालीन रिकॉर्ड इस दावे की पुष्टि नहीं करते। ना ही मुग़ल काल की क्रॉनिकल्स में इसका कोई जिक्र मिलता है। 

ये कहानी किसी पुख़्ता स्रोत पर आधारित नहीं है। यह लोककथा या अफवाह जैसी ज्यादा लगती है, जो वर्षों से चली आ रही है।  

कुछ दस्तावेजों में तो यह भी कहा गया है कि: मज़दूरों और कारीगरों को ताजमहल बनने के बाद जीवन भर की पेंशन और पुरस्कार भी दिए गए थे।

यह बात ब्रिटिश लेखकों, यात्रियों और लोककथाओं से फैलनी शुरू हुई। अफवाहों और कल्पनाओं ने इसे एक "डरावनी ऐतिहासिक कहानी" बना दिया।

ताजमहल को बनाने में 22 साल लगे। यह प्रेम, वास्तुकला और मुग़ल कला का अद्भुत उदाहरण है। इसे कटे हुए हाथों की त्रासदी के रूप में देखना सही नहीं है।।

"ताजमहल के बाद 20,000 मज़दूरों के हाथ काटे गए" – कोई ऐतिहासिक सच्चाई नहीं। यह सिर्फ एक मिथक है जिसे समय के साथ लोग सच मान बैठे।