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क्या आप जानते हैं भारत का सबसे छोटा गांव? जहाँ रहते हैं सिर्फ 2 लोग!

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भारत विविधताओं से भरा देश है, जहाँ हर गांव, हर कस्बा और हर शहर की अपनी एक अलग पहचान होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव भी है जहाँ सिर्फ 2 लोग रहते हैं? जी हाँ, आपने सही पढ़ा। भारत का सबसे छोटा गांव का नाम है ‘हिंडासूगुर’,(Hindasugur) जो स्थित है कर्नाटक के रायचूर जिले में।


भारत का सबसे छोटा गांव – सिर्फ 2 लोग, लेकिन इतिहास से भरा पड़ा है!

हिंडासूगुर’ गांव ना केवल भारत का सबसे छोटा गांव है, बल्कि यह एक अनोखा इतिहास और भूगोल समेटे हुए है। यह गांव कर्नाटक राज्य के रायचूर जिले की लिंगसुगुर तालुका में आता है।

2011 की जनगणना के अनुसार, यहां सिर्फ 2 निवासी दर्ज किए गए थे – एक पुरुष और एक महिला। यह आंकड़ा इसे आधिकारिक रूप से भारत के सबसे छोटे गांवों में शामिल करता है।


हिंडासूगुर गांव की लोकेशन और भूगोल

हिंडासूगुर(Hindasugur) गांव दक्षिण भारत के एक सूखा प्रभावित इलाके में स्थित है। यह कर्नाटक (Karnataka) राज्य के Raichur जिले की Lingsugur तहसील में स्थित है।
2011 की जनगणना के अनुसार, यहां केवल 2 लोग रहते थे। यह गांव ज्यादातर पथरीली जमीनों से घिरा हुआ है और यहां खेती करना बहुत मुश्किल है। पानी की भारी किल्लत और रोजगार के साधनों की कमी के कारण धीरे-धीरे इस गांव से लोग पलायन करते चले गए।

आज की तारीख़ में, यहाँ सिर्फ दो ही लोग बचें हैं जो इस गांव की यादों और परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं।


इन दो लोगों की कहानी क्या है?

गांव में रहने वाले ये दो लोग बुज़ुर्ग हैं, जो गांव छोड़कर कहीं और जाने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि उनका जीवन इसी गांव से जुड़ा है – यहीं उनका जन्म हुआ, यहीं उनकी आत्मा बसी है।
यह दो लोग ही अब गांव की देखभाल करते हैं – मंदिरों की सफाई, खेतों की देख-रेख और पारंपरिक त्योहारों का आयोजन।


गांव क्यों हुआ खाली?

इस गांव के खाली होने के पीछे कई कारण हैं:

  1. पानी की भारी कमी
  2. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव
  3. रोजगार के साधनों की कमी
  4. आधुनिक जीवनशैली की तलाश में युवाओं का पलायन

धीरे-धीरे पूरा गांव खाली होता चला गया। युवा पढ़ाई और नौकरी के लिए शहर चले गए और बुजुर्ग भी अपने परिवार के साथ रहने के लिए अन्य स्थानों पर बस गए।


आज कैसा दिखता है ये गांव?

आज हिंडासूगुर एक शांत, वीरान लेकिन सुंदर गांव बन चुका है। यहां टूटी-फूटी इमारतें, खाली गलियाँ और कुछ पुरानी हवेलियाँ दिखाई देती हैं। हालांकि, जो दो लोग यहां रहते हैं, वो अपने जीवन से संतुष्ट हैं।

उनके पास खेत हैं, कुछ मवेशी हैं और ढेर सारी यादें हैं।

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क्या ये गांव भविष्य में दोबारा बस सकता है?

यह सवाल उठाना लाज़मी है – क्या यह गांव एक बार फिर से जीवन से भर सकता है? इसका जवाब है – हां, अगर सरकार और स्थानीय प्रशासन यहां:

तो शायद यह वीरान गांव फिर से गुलज़ार हो सकता है।


भारत में ऐसे और भी गांव हैं?

हां, भारत में कई ऐसे गांव हैं जहाँ आबादी बहुत कम है। कुछ गांवों में सिर्फ 5-10 लोग रहते हैं।
उदाहरण के लिए:

लेकिन हिंडासूगुर भारत के उन गांवों में से एक है जिसकी जनसंख्या सिर्फ 2 है – और यह इसे बेहद खास बनाता है।


अंत में – एक सवाल हम सबके लिए:

क्या हम ऐसे गांवों को फिर से जीवित करने के लिए कुछ कर सकते हैं? क्या शहरीकरण के इस युग में हम अपनी जड़ों से जुड़ सकते हैं?

हो सकता है, यही गांव कल को किसी के लिए शांति का स्वर्ग बन जाए।

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